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नए भारत की हिन्दुमयी राजनीति

नए भारत की हिन्दुमयी राजनीति

स्वामी विवेकानंद और वामपंथी बौद्धिक जगत की खोखली दलीलें

स्वामी विवेकानंद और वामपंथी बौद्धिक जगत की खोखली दलीलें

संविधान दिवसः नन्दलाल बोस के 22 चित्र और नए भारत का अभ्युदय

संविधान दिवसः नन्दलाल बोस के 22 चित्र और नए भारत का अभ्युदय : आज ही के दिन (26 नवम्बर 1949) हम भारतीयों का संविधान बनकर तैयार हुआ था। आज 71 वर्ष बाद हमारा संविधान क्या अपनी उस मौलिक प्रतिबद्धता की ओर

अक्षय ऊर्जा उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव की इबारत

अक्षय ऊर्जा उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव की इबारत

छद्म बुद्धिजीवियों और विदेशी मीडिया का याराना

छद्म बुद्धिजीवियों और विदेशी मीडिया का याराना

छद्म बुद्धिजीवियों और विदेशी मीडिया का याराना

छद्म बुद्धिजीवियों और विदेशी मीडिया का याराना

सर्पदंश: हर दस मिनट में असमय मरता एक गरीब भारतीय

सर्पदंश: हर दस मिनट में असमय मरता एक गरीब भारतीय

सर्पदंश: हर दस मिनट में असमय मरता एक गरीब भारतीय

सर्पदंश: हर दस मिनट में असमय मरता एक गरीब भारतीय

नया भारत और नेहरुयुगीन वैचारिकी का पिंडदान

नया भारत और नेहरुगीन वैचारिकी का पिंडदान

नया भारत और नेहरुयुगीन वैचारिकी का पिंडदान

नया भारत और नेहरुगीन वैचारिकी का पिंडदान

लोक परिवहनः नेता-अफसर गठजोड़ की केस स्टडी

लोक परिवहन: नेता-अफसर गठजोड़ की केस स्टडी

लोक परिवहनः नेता-अफसर गठजोड़ की केस स्टडी

लोक परिवहन: नेता-अफसर गठजोड़ की केस स्टडी

1971 की तस्वीर से क्या साबित करना चाहती है कांग्रेस

1971 की तस्वीर से क्या साबित करना चाहता है कांग्रेस

लोक परिवहनः नेता-अफसर गठजोड़ की केस स्टडी

लोक परिवहन: नेता-अफसर गठजोड़ की केस स्टडी

लोक परिवहनः नेता-अफसर गठजोड़ की केस स्टडी

लोक परिवहन: नेता-अफसर गठजोड़ की केस स्टडी

चीन सीमा तनाव और कांग्रेस

चीन सीमा तनाव और कांग्रेस

सड़ांध मारता अल्पसंख्यकवाद

डिकांध मारिन मिनकवाद

सड़ांध मारता अल्पसंख्यकवाद

डिकांध मारता मिनकवाद

बाजार के बीच कोरोना

बाजार के बीच कोरोना
#आज के दैनिक जागरण *दिवालिया होते डिस्कॉम और मुनाफा कमाती प्राइवेट कम्पनियां* (डॉ अजय खेमरिया) उप्र विधुत निगम बर्ष 2000 में 77 करोड़ के घाटे में था आज यह आंकड़ा 83 हजार करोड़ पहुँच गया है।बिहार में 67 हजार करोड़ है.प्रदेश सरकार को उल्टा उधार देने वाले मप्र में  ये कम्पनियां 52 हजार करोड़ के घाटे में है।देश भर के सभी डिस्कॉम के घाटे को जोड़ दें तो यह करीब 10 लाख करोड़ के आसपास है।विधुत अधिनियम 2003 में संशोधन के मौजूदा प्रस्ताव का देश भर में विरोध हो रहा है। सभी राज्यों के बिजली इंजीनियर्स ने एक जुट होकर सरकार से न केवल इन संशोधन को वापिस लेने बल्कि  सभी विधुत कम्पनियों को भंग कर पुरानी निगम/बोर्ड व्यवस्था बहाल करने की मांग भी दोहराई है।इस विरोध का बुनियादी आधार  2003 कानून की व्यवहारिक विफलता ही है। जिसके तहत  तत्कालीन बिजली बोर्डों को विघटित करके कम्पनियों में बदला गया।ताकि उत्पादन, पारेषण,और वितरण को व्यावसायिक और उपभोक्ता अधिकारों के मानकों पर व्यवस्थित किया जाए।लेकिन आज ये कम्पनीकरण प्रयोग पूरी तरह से विफल हो गया है।इसके मूल में अफ़सरशाही को देखा जाता है जिसने कम...